जालंधरः अवैध कालोनियों के प्लाटों और कोठियों की रजिस्ट्रियां रोकने की खबर बेशक सबके सामने आ गई हो लोकिन जो हालात हैं वो कुछ और ही बयां कर रहे हैं। न तो अवैध कालोनियां कटती बंद हुई हैं और न ही उनके प्लाटों की रजिस्ट्रियां होनी बंद हुई है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के आदेशों की धज्जियां जालंधर में खुलेआम उड़ाई जा रही है। यहां डिलवां रोड पर एक अबैध कालोनी कथित रूप से काटी गई है और बताया जाता है कि यह कालोनी 10 एकड़ में कटी है जिसमें 2 एकड़ जमीन तो सरकारी है।
यानि रजिस्ट्रियां रोकने की बात तो छोड़िए यहां पर तो सरकारी जमीन पर ही कब्जा कर लिया गया। अब जब कालोनाइजर सरकार की जमीन को कब्जाने में कसर नहीं छोड़ रहे तो फिर वो सरकारी विभाग से रजिस्ट्री से आसानी से करवा रहे होगे।
इन सवालों के जवाब बाकी
इस कालोनी पर अभी तक एवशन क्यों नहीं हुआ? किस सरकारी बिभाग की जमीन पर प्लाट काटे गए हैं? रेजीडेंशियल प्लाटों के साथ कामर्शियल प्लाटों की मंजूरी किसने दी?
क्या सरकार के किसी अफसर या नेता के साथ कालोनाइजर की सैटिंग के कारण कालोनी कटी? इस कालोनी को अगर अप्रूव करवाया जाता तो सरकार के खजाने में कितना राजस्व आता?

