जालंधर | शहर के मॉडल टाउन में स्थित एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल एक बार फिर अभिभावकों के निशाने पर है। कारण है—स्कूल द्वारा आयोजित किए जा रहे सम्मान समारोह में अभिभावकों की एंट्री को लेकर लागू किया गया एक नया नियम, जिसे अभिभावक भेदभावपूर्ण और अनुचित बता रहे हैं। स्कूल प्रशासन ने उन छात्रों को सम्मानित करने के लिए एक समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिनके 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक आए हैं। लेकिन समारोह की घोषणा के बाद स्कूल की ओर से एक ऐसा निर्देश आया जिसने अनेक अभिभावकों को नाराज कर दिया।
अभिभावकों के मुताबिक, स्कूल ने कहा है कि 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों के अभिभावकों को ही समारोह में आने के लिए ओटीपी भेजा जाएगा।
• 90 से 94.9 प्रतिशत अंक वाले बच्चों को कार्यक्रम में अकेले आने को कहा गया है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि यह सिस्टम “सम्मान” के नाम पर स्पष्ट भेदभाव है। अभिभावकों ने उठाए सख्त सवाल अभिभावकों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह अनुचित है, क्योंकि स्कूल नर्सरी से +2 तक के लिए मोटी फीसें लेता है।
फीस के अलावा भी समय-समय पर कई अतिरिक्त शुल्क वसूले जाते हैं। लेकिन जब बच्चों को सम्मानित करने की बात आती है तो स्कूल छोटे ऑडिटोरियम का हवाला देकर अभिभावकों की एंट्री सीमित कर देता है। एक अभिभावक ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “क्या 95 प्रतिशत वाले बच्चों ने ही सारी फीसें भरी हैं? क्या 90 प्रतिशत लाने वाले बच्चों की फीस कम होती है? तो फिर उन्हें अकेले भेजने का नियम क्यों?”
अभिभावकों का कहना है कि यह विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले भी यह स्कूल अपने फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में रहा है।
